ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की...
छुप छुप कर रोज़ तुम्हारी DP देखना
तुम्हारे Msgs का इंतज़ार देर रात तक करना
और मिलने पर बस दूर से देखकर आहें भरना
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की।
वो रात को सोने से पहले Video Chat करना
और पूछना कि यार एक बार मिल लो बाहर आकर,
फिर तुम्हारे मना करने पर उदास हो जाना
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की ।
आते जाते उसकी balcony की तरफ़ झाँकना,
तुम्हारे रोज़ आने जाने वाले रास्तों पर मिलना
और इतवार के पूरे दिन तुम्हें miss करना
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की ।
मेरे दोस्तों का तुम्हारा नाम भाभी बुलाना
और जो भी बात मैं उनसे करता हूँ,
उन सब बातों को, तुमसे जोड़कर मुझे चिड़ाना
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की ।
तुम्हें किसी अनजान से बात करता देख बुरा लगना
और मौक़ा मिलते ही तुम पर ढेर प्यार बरसना,
कि कही कोई छीन ना ले तुम्हें मुझसे
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की ।
ग़ुस्से में आकर तुम्हारा वो भोहे तानना
इस बात मेरे दिल का मचल जाना
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की,
कि आँखो के इशारों से भी हँसी खिल उठतीं है।
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