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Saturday, 6 July 2024

बड़ी- छोटी बाते...

 Part 1

1. I loved you deep of my heart even my unconscious still feels ur words in my ear. U gone and brought my soul along with u. 


2. मुद्दतो के बाद मेरे मेसिज पर उनका reply आया - कि “तुम कौन ?”

जब मैंने अपना परिचय दिया तब बोले -

“Oh Hi!!! I have Moved On”


3. ये जो साज़िशहै तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की , मुझे नींद से उठाने की 

क्या मिलेगा इनको ? इस तरह से अपने ही ख्यालों से बाहर लाने में??

प्रेम माँझी


ख्यबो की किश्तियों पर बैठी, 

उम्मीदों के समुंदर से जा रही थी।


रास्ते में इश्क़ की एक भँवर दिखी,

और जोश में उसमें तैरने का मन हुआ

जब उससे तैरकेर बाहर आयी, 

तो कुछ घटा हुआ सा महसूस हुआ ।


रास्ते में तो अभी भी चल रही थी

पर लगा की कोई पीछे से पुकार रहा

मैं मुड़ी कई बार, पीछे गयी भी 

और हर बार दिल तेज धड़कता रहा। 


कोई ना मिला कभी ना मिला, और ना मिलेगा 

ये मैं अपने मन को समझाती रही।

कैसा पागलपन है उस इश्क़ के भँवर का 

आज भी मन वही अटका हुआ है

नियति नही वो मेरी, सिर्फ़ सपना है 

ये मन समझता ही नही है।






मेरे अपने सपने!

 

क्यूँ रुक गया वो समय मेरी आँखो में,

जब तुमसे मिली थी ।

वो कैसे याद है हर बात वैसे के वैसे ही,

क्या ज़रूरी था उस दिन का होना भी?

सब दे दिया था तुमको..सपने, कशिश..

चले गए छोड़कर क्यू दूर फिर भी।

तुमने तो ना सोचा, ना मुड़कर देखा कभी 

और टूट गए वो भी जो थे मेरे.. सपने, क़शिश ।

चारित्रहीन

 

मैं मिली तुमसे अपनी सारी आभा खो कर,

इस संसार के रीत रिवाजों को छोड़कर।


हँसना, रोना और रूठना सब भूली हूँ

तुमको मन में रखकर, लगता है कि बस पूरी हूँ


क्यू फँसा दिया मुझक, तुमने इस दुविधा में?

सोना, खाना सब छूटा है रात और दिन में।


अब कोई कुंती या अहिल्या की कहानी ना सुनते,

लोग तो बस इन्हें चरित्रहीन समझते और ऐसे प्रेम को पाप बताते।।

नाराज़ कौन??

 दिन थे वो जब तुमसे बिछड़ कर रह ना पाते थे हम,

ना सोचा था हमने कि कभी जी पाएँगे तुम्हारे बिन!

ख़ैर.. जाने अनजाने फिर मिल गए जीने के कई बहाने,

अब तो डर लगता है, कहीं तुम फिर ना मिल जाओ।


नाम इसको दे सकते हो मेरी बेवफ़ाई का तुम, 

पर जो ख़ुद छोड़ जाए उनकी नाराज़गी कौन माने?

Saturday, 9 May 2020

माँ तेरी याद सतती है।

माँ तेरी याद सताती है।
नन्ही सी बीज थी मैं, तूने अपने से सींचा होगा;
फिर छोटी सी गुड़िया को, लाडो से पाला होगा।
उसको खाना, बोलना, चलना, सब सिखया होगा; 
क्या पता था उस माँ से ही अलग होना होगा।
तेरे सारे काम याद है, माँ तेरी याद सताती है।
अच्छा करने पर सब सबशी मुझे ही दें देते,
और ख़राब होने पर मेरी माँ के संस्कार बताते;
जब तुझे तंग करती थी ना मैं, तो तुम भी-
सुनती थी कि जब माँ बनोगी तब पता लगेगा।
तेरी सारी बातें याद है, माँ तेरी याद सताती है।
क्यू बड़ी हो गयी मैं बिल्कुल अच्छा नही लगता, 
कितने काम,कितनी बातें, कितने रिश्ते हो गये;
बहुत मन करता है कि फिर से छोटी हो जाऊ,
फिर तेरी गोदी में सर रखकर सो जाऊ।
तेरा सारा प्यार याद है माँ तेरी याद सताती है।

Sunday, 30 September 2018

इश्क़ की सीढ़ियाँ।


ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की...

छुप छुप कर रोज़ तुम्हारी DP देखना 
तुम्हारे Msgs का इंतज़ार देर रात तक करना 
और मिलने पर बस दूर से देखकर आहें भरना


ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की।

वो रात को सोने से पहले Video Chat करना
और पूछना कि यार एक बार मिल लो बाहर आकर,
फिर तुम्हारे मना करने पर उदास हो जाना 
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की

आते जाते उसकी balcony की तरफ़ झाँकना,
तुम्हारे रोज़ आने जाने वाले रास्तों पर मिलना 
और इतवार के पूरे दिन तुम्हें miss करना 
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की

मेरे दोस्तों का तुम्हारा नाम भाभी बुलाना
और जो भी बात मैं उनसे करता हूँ,
उन सब बातों को, तुमसे जोड़कर मुझे चिड़ाना 
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की

तुम्हें किसी अनजान से बात करता देख बुरा लगना
और मौक़ा मिलते ही तुम पर ढेर प्यार बरसना,
कि कही कोई छीन ना ले तुम्हें मुझसे 
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की

ग़ुस्से में आकर तुम्हारा वो भोहे तानना
इस बात मेरे दिल का मचल जाना 
ये कैसी गुफ़्तगू है इश्क़ की,
कि आँखो के इशारों से भी हँसी खिल उठतीं है।