दिन थे वो जब तुमसे बिछड़ कर रह ना पाते थे हम,
ना सोचा था हमने कि कभी जी पाएँगे तुम्हारे बिन!
ख़ैर.. जाने अनजाने फिर मिल गए जीने के कई बहाने,
अब तो डर लगता है, कहीं तुम फिर ना मिल जाओ।
नाम इसको दे सकते हो मेरी बेवफ़ाई का तुम,
पर जो ख़ुद छोड़ जाए उनकी नाराज़गी कौन माने?
No comments:
Post a Comment